आस्था

कुछ लोग इसे विश्वास भी कहते हैं । लेकिन आस्था और विश्वास दो अलग चीजें हैं । विश्वास टूटते भी हैं और बदलते भी हैं । लेकिन आस्था अटूट होता है । अक्सर लोग आस्था को अन्धविश्वास के साथ जोड़ देते हैं । वास्तव में प्रश्न यह नहीं है की आस्था विश्वास है या अन्धविश्वास । यह जान भी गए तो आप क्या कर लेंगे ?

लाभ तो आपको यह जानने में है की क्या बास्तब में मनुष्य को आस्था से कोई लाभ होता है या नहीं । क्यूंकि अगर वास्तव में आस्था से लाभ होता है तो आपको भी उसका लाभ उठाना चाहिए ।

ऐसी मान्यता है कि आस्था को समझने के लिए आपको ज्ञान की आवश्यकता है । परन्तु में सरल तरीके से आस्था तथा इसकी शक्ति के बारे में आपको समझाने का प्रयास करूँगा ।

आस्था एवं इसकी शक्ति क्या है ?

आस्था

कल्पना कीजिये की आप एक अँधेरे जंगल में हैं । चारों तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा है । कहीं कुछ भी दिख नहीं रहा । ऐसे में दूर आपको एक रोशनी दिखी ।

अब आप क्या करेंगे ?

निसंदेह आप उस रोशनी की तरफ बढ़ेंगे । क्योंकि अब आपको उस घने अंधेरे में एक दिशा मिल गया ।

अंधेरे में आपको कुछ नहीं दिख रहा था । आप को यह भी नहीं समझ आ रहा था कि किस तरफ कदम बढ़ाएं । लेकिन उस रोशनी को देखकर अब आपको एक उम्मीद मिल गई।

अंजाम तो अब भी आपको नहीं पता । लेकिन फिर भी आप निश्चित रूप से उसी रोशनी की तरफ ही बढ़ेंगे ।

बढ़ते बढ़ते कहीं आप टकरा गए, इधर-उधर घूम गए, गिर गए, जो भी हुआ, चाहे रास्ते में पहाड़ आ जाए, नदी नाला कुछ भी आ जाए पर आप उसी रोशनी की तरफ ही उसी दिशा में ही बढ़ेंगे । रास्ता नहीं भटकेंगे आप ।

यह होता है आस्था

देखिए जिंदगी एक अंधेरे जंगल की तरह है । आप को कुछ नहीं पता होता कि आगे क्या होगा । पढ़ाई से लेकर जॉब तक, शादी तक, रिश्तों तक, कोई निश्चितता नहीं होता । किस चीज का क्या परिणाम होगा कुछ नहीं पता । अरे कल इसी वक्त आप जिंदा होंगे भी कि नहीं उसकी भी कोई निश्चितता नहीं है ।

मतलब अंधेरा ही अंधेरा । ठीक उस अंधेरे जंगल की तरह ।
ऐसे में आपको जिंदगी नाम के इस अंधेरे जंगल में चाहिए एक रोशनी, जिसे हम कहते हैं आस्था ।

क्यों जरूरी है आस्था आप को ? इससे फायदा क्या होता है ?

आस्था

देखिए अनिश्चित जिंदगी में एक निश्चित दिशा दिखाने के लिए आस्था चाहिए । आप कभी भी खुद को अकेले नहीं पाएंगे । जितने भी लोगों को अंदर से एक अकेलेपन की शिकायत है निश्चय ही उनके जिंदगी में एक मजबूत आस्था नहीं होगा ।

क्योंकि, अगर आपके पास एक मजबूत आस्था है तो आप अकेले ही पर्याप्त हैं । फिर अकेलापन कैसा !
चलिए मैं अपनी कहानी बताता हूं, आप relate कर पाएंगे ।

मेरे जीवन में बहुत सारे समस्याएं हैं । आप में से जो भी मुझे व्यक्तिगत रूप से जानते हैं उन्हें तो पता ही है ।

और ऐसे ऐसे challenges आए दिन आते ही रहते हैं जीवन में कि मैं क्या बताऊं । कई ऐसी चीजें हुई है मेरे जीवन में जहां लोग या तो हार मान लेते हैं या फिर आत्महत्या कर लेते हैं ।

पर मैं टिका रहा ।

ना मैं टूटा ना मैं कमजोर पड़ा । कोई डिप्रेशन नहीं, कोई एंजाइटी नहीं । उल्टा में खुश होने के साथ-साथ संतुष्ट भी रहा ।

जरा सोचिए ऐसा मैं क्यों कर पाया ?

बस उस आस्था के वजह से ।

कैसे ?

बहुत ही छोटा था मैं तब से हमारे घरों में टीवी में रामायण, महाभारत, विष्णु-पुराण बगैरा देखा जाता था । पापा इन्हीं सबकी कहानियां बताते थे ।

फिर थोड़ा बड़ा हुआ तो मैंने खुद इन सब विषयों पर अध्ययन किया । फिर मैं अपनी दीदी से भी बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ इन सब चीजों को लेकर ।

तो कहीं ना कहीं मन में एक छवी बैठता गया प्रभु श्री कृष्ण का बचपन से ही ।

एक अटूट विश्वास बनता गया उन पर की वे तो मेरे साथ कुछ गलत होने देंगे ही नहीं । मुझे अंदर से ऐसा लगता है बचपन से ही कि कुछ भी हो जाए वह है मेरे साथ हमेशा मेरा हाथ थामे हुए ।

इसीलिए जीवन के दुर्भाग्य में भी ना मैं टूटा और ना ही मुझ पर उसका कोई ज्यादा असर हुआ । हां थोड़ा दुख दर्द तो होगा ही। वह सामान्य है, होना भी चाहिए । पर कभी भी वह चीजें मुझ पर हावी नहीं हो पाईं ।

मजे की बात बताऊं, इसीलिए कुछ लोगों को लगता है कि यह बंदा थोड़ा खिसका हुआ है । अपने जीवन को लेकर बिल्कुल भी serious नहीं है ।

पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । अंग्रेजी में एक कहावत है – “Take life seriously but don’t be serious in life”

वजह यही है । मैं यही करता हूं । प्रभु श्री कृष्ण पर मेरी आस्था इतनी मजबूत है कि मुझे कभी लगता ही नहीं कि वह मेरे साथ कुछ बुरा होने देंगे । अगर कुछ बुरा होता दिख रहा है तो उसमें भी मेरे लिए कुछ अच्छा ही होगा ।

और यकीन मानिए मेरी आस्था आज तक कभी नहीं टूटी और ना ही गलत साबित हुई । जो भी मेरे साथ बुरा हुआ उसमें से मुझे कुछ अच्छा ही मिला । तो वक्त के साथ मेरी आस्था और भी मजबूत होती गई ।

साथ ही साथ एक और बात भी हुई जो मुझे किसी चमत्कार से कम नहीं लगता । जिन्होंने मेरे खिलाफ षड्यंत्र किया या मेरा फायदा उठाना चाहा उनसे भी हर बार में किसी न किसी तरीके से बच गया और वह लोग खुद बुरे फंसे । और यह एक बार नहीं बार-बार हुआ है ।

यह फायदा होता है एक मजबूत आस्था का ।

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संभव है आपको इन बातों पर विश्वास नहीं हो रहा होगा । या फिर आपको लग रहा होगा कि मैं बढ़ा चढ़ा कर बता रहा हूं ।

जन्म से ही मेरी दृष्टि शक्ति सामान्य लोगों से बहुत कम है । आप जितना देख सकते हैं उसके 10 भाग का एक भाग में देख सकता हूं । तो कल्पना कीजिए मेरे लिए सामान्य जीवन जीना कितना कठिन होगा । अपितु आप मेरे मित्रों से और मुझे जानने वालों से पूछेंगे तो वह बताएंगे कि मैं एक सामान्य जीवन जीता हूं ।

निसंदेह परेशानी और कष्ट हर स्थान पर होती है मुझे । परंतु किसी ना किसी तारह मेरी वह परेशानी हल भी हो जाती है । ऐसा लगता है मानो प्रभु श्री कृष्ण भिन्न-भिन्न रूप में आकर मेरी मदद कर जाते हैं । अन्यथा मुझे नहीं लगता कि मैं जीवन सरलता से जी पाता । ऊपर से दुनिया वालों को जब पता चल जाता है कि आपको ऐसी कोई समस्या है तो वह आपका जीना और भी कठिन कर देते हैं ।

परंतु मैं दृढ़ विश्वास से कह सकता हूं कि यह मेरी आस्था की ही शक्ति थी जिसके कारण मैं इन कठिनाइयों से सफलतापूर्वक निकल पाया और सफलतापूर्वक एक साधारण मनुष्य की तरह जीवन यापन करता आया हूं ।
अभी कुछ दिन पहले ही मेरी शादी भी हुई है और यकीन मानिए मुझे एक बहुत अच्छी पत्नी और ससुराल मिला है । जो मुझे समझते भी हैं और मुझे पूरा सम्मान और प्यार भी दे रहे हैं । संभव है कि लोग इसे मेरा सौभाग्य कहें । परंतु यह कोई भाग्य का खेल नहीं अपितु प्रबल आस्था का परिणाम है ।

आपका आस्था कुछ भी हो सकता है ।

वह भगवान हो सकते हैं, प्रकृति हो सकती है, एनर्जी हो सकता है, आपके पैरेंट्स हो सकते हैं, आपका आत्मविश्वास हो सकता है, आपके प्रिंसिपल्स हो सकते हैं, आपकी डिग्निटी हो सकती है या फिर तो किसी का सच्चा प्यार भी हो सकता है । बस ऐसी चीज होनी चाहिए जिस पर आपका विश्वास टूटना असंभव है । क्योंकि असली कमाल तो उस अटूट विश्वास का ही है । ऐसा अटूट विश्वास अगर आप किसी इंसान पर करते हैं तो वह इंसान भी सच्चा और ईमानदार होना चाहिए ।

अगर ऐसा कुछ है आपके पास तो यह डिप्रैशन, एंजायटी यह सब कुछ आपको छू भी नहीं सकता । जीवन का कोई भी समस्या, कोई भी परिस्थिति आप पर हावी नहीं हो पाएगा ।

मेरे जीवन में अगर ऐसा कुछ होता है जिस पर मैं बिल्कुल नियंत्रण नहीं कर पाता, मेरा कुछ भी नहीं चलता, तो बस मैं अपने मन में अपने आस्था पर ध्यान लगाता हूं । और उनसे कहता हूं ” प्रभु मेरे बस का नहीं है आप संभाल लेना”

और अंदर से एक आवाज आती है “अरे मैं हूं ना । मैं संभाल लूंगा । तू क्यों चिंता करता है ।”
बस उसके बाद तो चमत्कार ही हुए हैं जीवन में ।
इसीलिए आपको भी अपने अंदर एक मजबूत आस्था की जरूरत है ।

और खासकर आज के दुनिया में जहां हर कोई अकेला पड़ता जा रहा है । दिल टूट रहे हैं, भरोसे टूट रहे हैं । हर कोई डरा हुआ है । कोई किसी पर विश्वास नहीं कर पा रहा । दूसरों की या हालातों की बात तो छोड़िए, लोग खुद के बारे में ही निश्चित नहीं हैं ।

क्या जिएंगे ऐसे लोग और क्या रिश्ते बनाएंगे । क्या कहानी होगी इनकी 50 साल बाद । इसीलिए हर किसी को अपनी जिंदगी में एक आस्था की जरूरत है । वह आस्था जो उन्हें एक निश्चितता दे, कम से कम उनके खुद के बारे में ।

बात कैरियर की हो, प्यार की हो, रिश्तो की हो, खुशियों की हो या फैसले लेने की हो आप रास्ता ना भटकें । डर आप पर हावी ना हो पाए । आत्मविश्वास आपका कमजोर ना पड़े । आप गिरें पर दोबारा उठ जाएं । इसलिए चाहिए आपको एक आस्था ।

याद रखिए आपका यह आस्था बुरे से बुरे वक्त में भी आपको सही रास्ता दिखाते हुए आपके मंजिल तक ले कर जाएगा । मंजिल से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है सफर । और आस्था अगर आपके मन मे हैं तो आपका सफर खुशहाल हो ना हो सुकून भरा जरूर होगा ।

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