वैवाहिक जीवन क्या है

वैवाहिक जीवन क्या है

विवाह । जो हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण विषय है । फिर चाहे आप विवाह करें या ना करें, पर इस विषय से अछूते नहीं रह सकते । क्योंकि यह जीवन के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है । वास्तव में लोग यह समझे बगैर की वैवाहिक जीवन होता क्या है, शादियां कर रहे हैं | फल स्वरूप divorce तथा separation की मात्रा इतना ज्यादा है । इसीलिए यह जानना भी बहुत जरूरी है कि वैवाहिक जीवन क्या है ।

किसी चीज को समझे बगैर कर जाएं तो उस पर निश्चित रूप से असफलता तो मिले

वैवाहिक जीवन क्या है ?

वैवाहिक जीवन क्या है

विवाह को प्रकृति ने नहीं बनाया । यह मानव निर्मित है
प्रकृति ने तो केवल कुछ जरूरतें बनाई है इंसान के लिए । उन जरूरतों को पूरा करने के लिए मनुष्य ने विवाह को बनाया ।
इनमें कई प्राकृतिक जरूरतें हैं और कई मानव निर्मित जरूरतें भी हैं ।

जैसे कि शारीरिक जरूरतें, मानसिक जरूरतें, भावनात्मक जरूरतें, आर्थिक जरूरतें, सामाजिक जरूरतें, और भी कई तरह के जरूरतें । वास्तव में इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए आप किसी से शादी करते हैं ।

अगर आपके पति या पत्नी आपके किसी भी जरूरत को पूरा ना कर पाएं तो आप उनसे शादी करते ही नहीं ।

जब आप निश्चित हो जाते हैं कि सामने वाला आपके किसी न किसी जरूरत को पूरा कर पाएंगे तब आप उससे शादी करते हैं | इसीलिए किसी से विवाह करके उनके सामने घमंड मत कीजिए या फिर यह मत जताइए कि आप ने उन पर कोई एहसान किया है, बल्कि उनका एहसान मानिए ।

बस इतनी सी बात अगर दुनिया के हर पति पत्नी को समझ में आ जाए तो उनके बीच के 80% झगड़े खत्म हो जाएंगे ।

विवाह के बाद जीवन में क्या परिवर्तन आता है ?

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याद रखिए विवाह से पहले का जीवन और विवाह से बाद का जीवन पूरी तरह से अलग होता है ।

विवाह के बाद कोई है जो आपके लिए खाना पकाती है, आपके कपड़े धोती है, आपके सुख सुविधा तथा सम्मान का ध्यान रखती है, आपके बच्चों का ध्यान रखती है ।

आपके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और भी ना जाने कितने जरूरतों को पूरा करती है । इसीलिए आप उनके सामने जवाबदेही हैं और उनके आभारी भी है ।

उसी तरह अगर कोई आपके आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रहा है, आपकी सुरक्षा कर रहा है, आप के नखरे झेल रहा है, आपको प्यार कर रहा है, आपकी जिम्मेदारी ले रहा है तो आप भी जवाबदेही हैं उनके सामने और उनके एहसानमंद भी हैं । फिर चाहे आप नौकरी करें या ना करें उससे फर्क नहीं पड़ता ।

और अगर कोई पति-पत्नी एक दूसरे के लिए यह सब कुछ नहीं कर सकते या नहीं करना चाहते, तो वह विवाह कैसे हुआ ?

इसमें कोई संदेह नहीं कि हर काम हर कोई कर सकता है | लेकिन जीवन को सहज, सफल, सुखद और बेहतर बनाने के लिए पुरुष-स्त्री आपसी सहयोग से एक नए रिश्ते में बंधते हैं जिसका नाम है विवाह | इसीलिए यह नियम बनाया गया कि वह काम बांट के करेंगे और एक दूसरे को पूर्ण सहयोग देंगे | साथ ही साथ एक दूसरे के लिए पूर्ण समर्पित भी होंगे |

तो जो भी पति-पत्नी यह कहते हैं कि मैं क्यों जवाब देही हूं, मैंने तो कोई गलती नहीं की, तो वह विवाह का मतलब ही नहीं समझे ।

आप जवाब देही इसलिए हैं क्योंकि अगर सामने वाले ने आपको विवाह के लिए चुना है तो आप उनके ऋणी हैं । एहसानमंद है आप उनके । क्योंकि उन्होंने अपने आप पर आपको अधिकार दिया है ।

अगर आपको यह बात गलत लग रही है तो आपको अपने जीवनसाथी से कोई उम्मीद रखनी भी नहीं चाहिए ।

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वैवाहिक जीवन क्या है ?

विवाह “मैं” और “तुम” से हम बनने का सफर है

छोटे से छोटे बात से लेकर बड़े से बड़े बात तक हम बनना पड़ता है । यहां जिम्मेदारियां भी हमारी बन जाती हैं और फायदे भी हमारे बन जाते हैं | बस मेरे या तुम्हारे नहीं रह जाते । जो भी लाभ होता है वह हमारा बन जाता है और जो भी नुकसान होता है वह भी हमारा बन जाता है ।

जो जोड़े इस विचारधारा के साथ अपने वैवाहिक जीवन को जीते हैं, उनका वैवाहिक जीवन सुखद होता है

और इसके विपरीत विचार धारा के साथ जीने वाले जोड़ों का वैवाहिक जीवन दुखद होता है । इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आप अपने चारों तरफ समाज में देख ही सकते हैं ।

वैवाहिक जीवन में क्या करना चाहिए

वैवाहिक जीवन होता क्या है ?

देखिए शादी के बाद आप सिर्फ अपने भूख-प्यास के बारे में नहीं सोच सकते, अब आपको अपने जीवन साथी के भूख-प्यास के बारे में भी सोचना पड़ेगा ।

जब आप ‘मैं’ थे यानी अकेले थे और एक रोटी होती थी आपके पास, तो आप पूरा खा जाते थे । अब आप ‘हम’ हैं और एक रोटी है तो आप उसे आधा खाएंगे और अपने जीवन साथी को आधा खिलाएंगे । यह होता है वैवाहिक जीवन

जब आपके अंदर ऐसी विचारधारा जन्म ले लेता है तब आरंभ होता है दो जिस्म एक जान होने की प्रक्रिया | फिर दुनिया का कोई भी सुख-सुविधा हो, वह आपको आपके जीवनसाथी के बगैर अधूरी लगने लगती है |

मैंने वैवाहिक जीवन का आरंभ कैसे किया

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मेरा अभी-अभी शादी हुआ है ।

और जो सबसे पहली बात मैंने अपनी पत्नी को सिखाया वह यही है – मेरा या तुम्हारा सुख अब हमारा सुख है । मेरा या तुम्हारा दुख अब हमारा दुख है । मेरा या तुम्हारा सम्मान अब हमारा सम्मान है । मेरे या तुम्हारे सपने अब हमारे सपने हैं | मेरा या तुम्हारा अपमान अब हमारा अपमान है । हम अलग नहीं हैं, हम एक हैं । दो जिस्म एक जान होना इसी को कहते हैं ।

तन, मन, सोच, समझ सब एक होना है वैवाहिक जीवन

और यह मेरी खुशकिस्मती है कि मेरी पत्नी भी मेरी तरह ही सोचती है । यानी हमारी सोच मिलती है । हमारे विचार मिलते हैं | इसीलिए सरलता से मन भी मिल पाया | और हर क्षण हम एक दूसरे के और भी करीब आते जा रहे हैं | एक दूसरे की हर खुशी में शामिल होकर अब हम उसे हमारी खुशी बना रहे हैं |

विवाह का मतलब ही यही है कि पति पत्नी एक सोच और एक लक्ष्य को लेकर जीवन में आगे बढें ।

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वास्तव में विवाह क्या है ?

मान के चलिए की शादी के बाद आप दोनों 50 साल साथ रहेंगे । इन 50 सालों में कई मतभेद होंगे, कई मुसीबतें आएंगे ।
कुछ समस्याएं आपके जीवन में आएंगे तो कुछ आपके जीवनसाथी के जीवन में आएंगे । उन समस्याओं को एक दूसरे का व्यक्तिगत समस्या मानने के बजाए हमारी समस्या मानना ही विवाह का वास्तविक मतलब है

वास्तविक तथा मानसिक स्तर पर पूरी तरह से एक दूसरे को अपना लेना ही है विवाह का अर्थ

वह भी 1 दिन के लिए नहीं अपितु सारे जीवन के लिए । वरना आजकल तो आपने देखा होगा एक करोड़ की लॉटरी लगी तो मेरा पति या मेरी पत्नी । और कहीं एक करोड़ का उधार लग गया तो डिवोर्स । उसके बाद यही लोग आपको शादी की बुराई करते मिलेंगे ।

शादी तो अपने आप में ही एक बहुत ही अच्छी चीज है । आपका शक्ति बढ़ाता है, आपका सामर्थ्य बढ़ाता है ।
आपकी सुख सुविधाएं बढ़ाता है, आप का मान सम्मान भी बढ़ाता है । आपके आर्थिक स्थिति को सुधारता है | मानसिक तथा भावनात्मक स्तर पर आपको बेहतर जिंदगी देता है । प्यार तथा खुशियों से भरता है आपके जीवन को । आप के चार हाथ हो जाते हैं । दो बुद्धि हो जाती है । पर यह सब कुछ तब होता है जब आप विवाह के वास्तविक अर्थ को समझ पाएं और उसे ग्रहण कर पाएं ।

क्या मौज मस्ती का अंत है विवाह ?

मौज मस्ती खत्म नहीं हो जाती बल्कि मौज-मस्ती का एक नया रूप आरंभ हो जाता है ।

आपके जीवन के हर क्षेत्र पर एक परिवर्तन आता है । जैसे आप स्कूल से कॉलेज में जाते हैं | स्कूल में टिफिन ब्रेक होता है पर कॉलेज में नहीं होता । पर क्या आप शिकायत करते है ?

नहीं ना !

आप उस नए परिवर्तन को बहुत ही खुशी के साथ अपनाते हैं ।

वैवाहिक जीवन भी ऐसा ही एक नया आरंभ होता है ।
बस सब ने एक धारणा बना ली है कि शादी का लड्डू जो खाए वह पछताए जो नहीं खाए वह भी पछताए । जब इस दृष्टिकोण से आप देखेंगे तो आपको वैवाहिक जीवन कठिन भी लगेगा और पछतावा भी होगा ।

ठीक है जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं । पर उसके साथ सुख सुविधाएं, खुशियां भी तो बढ़ती हैं ।

कुछ देकर कुछ नया पाने का नाम है विवाह । साथ मिलकर कुछ नया बनाने का नाम है विवाह ।

जिन लोगों को व्यक्तिगत जीवन से ज्यादा प्रेम है विवाह उनके लिए नहीं है । ऐसे लोग विवाह ना ही करें तो बेहतर है । इससे यह खुद भी खुश रहेंगे और किसी और के दुख का कारण भी नहीं बनेंगे ।

आधुनिक समाज का वैवाहिक जीवन पर असर

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आज से 30 साल पहले तक समाज अलग था । लोगों की सोच अलग थी । अपने सारे जरूरतों को पूरा करने का लोगों के पास एकमात्र बेहतर विकल्प था विवाह

पर आज ऐसा नहीं है । आधुनिक विचारधाराएं आ चुकी हैं । आजकल living together भी चलता है । शारीरिक से लेकर भावनात्मक हर जरूरत सरलता से पूरी हो रही है । अब यह सब कितना सही है कितना गलत है यह तो हम सब मिलकर ही तय कर सकते हैं । किसी के लिए सही है तो किसी के लिए गलत है ।

वह जो भी हो आजकल यह सब भी चल रहा है । अर्थात आपकी जरूरतें पूरा करने के बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं । तो ऐसी स्थिति में विवाह सबके लिए अनिवार्य नहीं है ।

बहुत ही आधुनिक सोच वाले व्यक्ति जो कि व्यक्तिगत जीवन को ही सर्वोपरि मानते हैं, निश्चित रूप से वैवाहिक जीवन  उनके लिए लोहे के चने चबाने वाली बात है । क्योंकि वैवाहिक जीवन मे ‘मैं’ और ‘तुम’ के लिए कोई जगह नहीं । उसके लिए अविवाहित रहना बेहतर विकल्प है ।

निष्कर्ष

सर रतन टाटा जी ने कहा है – “मैं सही निर्णय लेने पर विश्वास नहीं करता, मैं निर्णय लेकर उसे सही करने पर विश्वास करता हूं |”

आप चाहे जितने भी आधुनिक क्यों ना हो जाएं, विवाह का मतलब नहीं बदलेगा | क्योंकि विवाह की प्रथा जीवन को और भी ज्यादा सरल और सुखद बनाने के लिए आरंभ किया गया है | इसमें अपने जीवन साथी के लिए समर्पित होना पड़ता है | अपने तथा अपने साथी के भले के लिए कई त्याग और कुर्बानियां देनी पड़ती है | समझदारी से ऐसे निर्णय लेने होते हैं जिसमें दोनों का भला हो | व्यक्तिगत फायदे को त्यागना पड़ता है | निर्णय ऐसे लेने पड़ते हैं जिसमें दोनों का फायदा हो | वैवाहिक जीवन वास्तव में व्यक्तिगत जीवन से ऊपर उठकर अगले पायदान तक जाने का नाम है | इसमें कुछ व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को त्यागकर कुछ नए सुख-सुविधाओं को पाया जाता है |

परिवर्तन जीवन की सच्चाई है और वैवाहिक जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का श्रेष्ठतम परिवर्तन हो सकता है | बस यह आप पर निर्भर करेगा कि आप इस परिवर्तन को बेहतर बनाते हैं या बत्तर बनाते हैं |

उम्मीद है आप वैवाहिक जीवन क्या है यह समझ पाए होंगे । किसी तरह के भी विचार-विमर्श या प्रश्न के लिए आप दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं । अन्यथा नीचे कमेंट करके अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं |

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