प्यार क्या है?

प्यार क्या है – वास्तव में प्यार और कुछ नहीं बस एक शक्तिशाली भावना या एहसास(feeling) का नाम है ।

यह दुनिया का वह एकमात्र रचनात्मक ऊर्जा है जिस के बगैर कोई भी सुख, सफलता और रिश्ता बेरंग है ।

यह सवाल सभी के मन में कभी ना कभी तो आता ही है के प्यार क्या है ?

कोई इसे चांद तारों से जोड़ता है तो कोई भूख प्यास से । पर वास्तव में प्यार का मतलब यह नहीं है । इसी तरह की बातों से भ्रमित होकर लोग प्यार में ऐसी चीजों को ढूंढने लगते हैं, जिसका वास्तविकता से कोई लेना-देना ही नहीं ।

प्यार का मतलब और प्यार में होने वाले अनुभव दो अलग-अलग चीजें हैं ।

प्यार होते ही आप बेचैनी महसूस करते हो । भूख प्यास लगना बंद हो जाता है । नींद नहीं आती । मन करता है हमेशा उसी के इर्द-गिर्द हों जिससे प्यार हो गया है । ऐसी और भी अनगिनत चीजें हैं जो प्यार हो जाने पर लगभग सभी महसूस करते हैं ।

सारे अनुभव प्यार हो जाने पर शरीर में होने वाले hormonal changes के वजह से होते हैं ।

इसीलिए यह सारी चीजें temporary होती हैं । क्योंकि वह हारमोन हमेशा आपके दिमाग में रिलीज नहीं होने वाले ।

इसका मतलब आप जिसे प्यार करते हो वह करते ही रहोगे लेकिन उससे जुड़े अनुभव बदलते रहेंगे । Hormones बदलेंगे तो अनुभव भी बदलेंगे । यह है वैज्ञानिक कारण

इसीलिए यह आवश्यक नहीं कि आपको भूख लगती है इसीलिए आपका प्यार झूठा है । क्योंकि लोगों की ऐसी मान्यता है कि प्यार में भूख नहीं लगती । या फिर आप अपने प्यार के लिए कोई बड़ा काम नहीं कर सकते तो वह झूठा है ।

यह सब मनगढ़ंत बातें हैं । इसीलिए सबसे पहले ऐसी बातों से बचिए । अन्यथा ये प्यार में आपको पथ भ्रष्ट कर देगा ।

देखिए प्यार में कुछ हद तक भूख ना लगना, नींद ना लगना संभव है । पर कुछ हद तक, हमेशा के लिए नहीं ।

क्योंकि आप किसी को जीवन भर प्यार कर सकते हो लेकिन जीवन भर भूख ना लगे, नींद ना लगे यह संभव नहीं । इसीलिए यह बातें कविताओं के लिए और प्रेम कहानियों के लिए ठीक हैं । वास्तविकता से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है ।

वास्तव में प्यार क्या है यह जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें ।

प्यार क्या है ?

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pyar ka matlab

Counselling

वास्तव में प्यार और कुछ नहीं बस एक शक्तिशाली भावना या एहसास(feeling) का नाम है । जैसे गुस्सा, नफरत, डर एक – एक भावना या फीलिंग है, यह भी उसी तरह एक भावना है ।

यह भावना इतना शक्तिशाली भी हो सकता है कि आप खुद ही अपना सब कुछ इस पर निछावर करने को तैयार हो जाएं ।

अगर किसी को सच्चा प्यार हो जाए तो उसका मन उस प्यार के बस में हो जाता है । तभी तो प्यार में असाधारण रचनात्मक क्षमता भी है और सर्वनाश करने की क्षमता भी । क्योंकि यह मन को एक ही चीज में लगाकर उसके असीम शक्ति का प्रयोग कर सकता है ।

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जी हां, प्यार मन से संचालित होता है, दिल से नहीं ।

दिल(heart) का काम तो शरीर में रक्त संचालन को नियंत्रण करना है । वास्तव में प्यार में जब भी हम दिल शब्द का प्रयोग करते हैं तो उसका मतलब मन ही होता है ।

Note : (यहां कुछ लोग असहमत हो सकते हैं । वे कहेंगे, तो फिर हमें दिल में पीड़ा क्यों अनुभव होती है ? ऐसा इसीलिए क्योंकि, मन में परिवर्तन आते ही दिल के कार्य प्रणाली में परिवर्तन आता है । जिस कारण आप दिल में पीड़ा अनुभव कर सकते हैं)

अन्यथा प्यार या प्रेम तो मन के एक एहसास या भावना का नाम है । यह भावना हमें किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या कार्य से जोड़े रखने का काम करती है ।

जब हमें किसी से प्यार होता है तो हम व्यक्तिगत रूप से उससे जुड़ जाते हैं । इसी कारण हम उस व्यक्ति के लिए गहरे आकर्षण का अनुभव करते हैं ।

प्यार एक बहुत ही शक्तिशाली अहसास है । यह एक सुखी जीवन का आधार है । जीवन में सुखी रहने के लिए आपको किसी व्यक्ति, वस्तु या कार्य से प्यार तो होना ही चाहिए । क्योंकि जब भी आपको किसी व्यक्ति, वस्तु या कार्य से सच्चा प्यार हो जाता है तो आपका मन खुद-ब-खुद पूरी तरह से उस चीज पर लग जाता है । जिस कारण अपार सुख की प्राप्ति हो सकती है । क्योंकि अगर आपका मन हजार चीजों में लगा रहेगा तो आपको सुख और शांति कम मिलेगा । वहीं अगर आपका मन किसी एक चीज पर लगा रहेगा तो आपको सुख और शांति की प्राप्ति ज्यादा होगी

प्यार – किसी व्यक्ति से

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pyar kya hai

अगर आपको प्यार किसी व्यक्ति से है तो आपका सारा सुख-दुख उस व्यक्ति से जुड़ जाता है ।

यहां समझने वाली बात यह है कि हर व्यक्ति मन से स्वतंत्र है । तो किसी पर भी अपना अधिकार मानना मूर्खता है । फिर चाहे आप उसे कितना ही प्यार क्यों ना करें ।

क्योंकि किसी के शरीर को तो बस में रखा जा सकता है, लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि उस शरीर के अंदर एक मन भी है, जिसे उसकी मर्जी के बिना अपने बस में रखना असंभव है ।

अगर आपने ऐसी कोशिश भी की तो उस व्यक्ति के दिलो-दिमाग में आपके लिए अपार घृणा भर जाएगा । और यह निश्चित है कि जैसे ही उन्हें कोई अवसर मिला वह आपको सर्वाधिक नुकसान अवश्य पहुंचाएंगे ।

इसीलिए जबरदस्ती का प्यार हमेशा नुकसानदायक होता है, फिर चाहे वह कम मात्रा में हो या ज्यादा मात्रा में । जिस पर लोग ध्यान नहीं देते और अकारण ही प्यार को बदनाम करते हैं ।
इसीलिए प्यार में अपने साथी को पूर्ण स्वतंत्रता देना आवश्यक है । क्योंकि प्यार किसी पर कब्जा करने का नाम नहीं है । ऐसा करना स्वार्थ हो सकता है, प्यार नहीं ।

कब्जे के साथ सच्चे प्यार का होना तो संभव ही नहीं है ।

हां अगर वह व्यक्ति अपनी मर्जी से खुद पर आपको अधिकार देता है तो वह प्यार है । क्योंकि प्यार अधिकार देने का नाम है, लेने का नहीं ।

इसीलिए अगर आप प्यार में किसी को किसी तरह से भी बाध्य करते हैं तो वह प्यार नहीं है । ऐसे प्रेम संबंधों का अंत हमेशा बुरा ही होता है ।

याद रहे सच्चा प्यार हमेशा समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ होता है ।

यानी जो सच्चे प्यार में पड़ जाते हैं वह अपना सब कुछ अपने प्यार को समर्पित करने लगते हैं ।

सच्चा प्यार और पूर्ण समर्पण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं ।

इसीलिए तो लोग सच्चे प्यार के लिए अपनी जान तक दे देते हैं। पूर्ण समर्पण तो बहुत ही छोटी सी चीज है ।

एक मां का प्यार इसका सर्वोच्च उदाहरण है ।

वैसा ही समर्पण प्रेम संबंध में भी होता है अगर वह सच्चा प्यार हो । इसीलिए सच्चा प्यार होते ही व्यक्ति खुद पर आपको पूर्ण अधिकार दे ही देते हैं ।

वे पूरी कोशिश करते हैं कि ऐसा कुछ भी ना करें जिससे आपको पिड़ा पहुंचे । वह आपके लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानियां देने को तैयार रहते हैं ।

बाकी स्वार्थ वाले प्यार में तो लोग थोड़ा सा भी sacrifice करना पड़े तो चिढ़ जाते हैं ।

इसीलिए किसी का प्यार आपके लिए सच्चा है या नहीं यह जानना कोई कठिन कार्य नहीं ।

प्यार – किसी वस्तु से

अगर आपको प्यार किसी वस्तु से हो जाए तो वह बड़ा ही खतरनाक है । क्योंकि अब आप उस वस्तु के अधीन हो जाते हो जो एक निर्जीव चीज है ।

आपका सुख-दुख उस वस्तु से जुड़ जाता है । जैसे कि पैसा, car, घर या आजकल तो मोबाइल भी ।

आप उस वस्तु के बिना रह भी नहीं पाओगे । और इस तरह आप सीमित होकर रह जाओगे । जिस कारण आप जीवन का और प्रेम का वास्तविक सुख कभी अनुभव नहीं कर पाओगे । इसीलिए इस तरह के प्रेम जाल से बचें ।

किसी भी वस्तु को उतना ही महत्व दें जितना उसका आपके जीवन में होना चाहिए । याद रखें वस्तुओं को दोबारा भी प्राप्त किया जा सकता है । इसीलिए उस से गहरे प्रेम के मोह जाल में पढ़ना मूर्खता है ।

प्यार -किसी कार्य से

जब आपको किसी कार्य से प्यार हो जाए तो वह आपके लिए सफलता का आधार बन जाता है । आप उस कार्य के लिए अपना सब कुछ निछावर करने लगते हो ।

वह कार्य चाहे जितना भी असाध्य क्यों ना हो, उस कार्य के लिए आपका प्रेम आपको नए मार्ग दिखाता है, उस कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए ।

दुनिया के कई सफल लोग इसके जीते जागते उदाहरण हैं । वे खुद भी अपनी सफलता का श्रेय अपने काम के लिए अपने प्रेम को देते हैं ।

इसमें संदेह करने जैसा कुछ भी नहीं । आपको प्यार चाहे किसी व्यक्ति से हो, वस्तु से हो या कार्य से हो, आपके सामर्थ्य और शक्ति का अधिकांश हिस्सा स्वता-ही उसमें प्रयोग में आ जाता है । ऐसे में सफलता मिलना स्वाभाविक है । क्योंकि यही तो प्यार है

निष्कर्ष

वास्तव में प्यार एक बहुत ही सुंदर एहसास है । यह आपको अपार सुख और आनंद देने वाला भावना है । लेकिन तब जब आप प्यार को उसके वास्तविक रूप में करें, ना के अपने शर्तों के मुताबिक । शर्तों के मुताबिक प्यार करना प्यार नहीं । प्यार खुद को समर्पण करने का नाम है, किसी और को खुद के सामने समर्पण करवाने का नहीं । प्यार अधिकार देने का नाम है – अधिकार मांगने का नहीं । कोई अपनी मर्जी से अपना प्रेम आपको दे तो वह प्यार है । अन्यथा अगर आप उसे बाध्य करके या किसी चतुराई से उसका प्रेम हासिल करते हैं तो वह प्यार नहीं । सच्चा प्यार आपके मन को उस व्यक्ति, वस्तु या कार्य के लिए पूर्ण रूप से समर्पित कर देता है । और यह केवल सच्चा प्यार में ही संभव है । अन्यथा झूठे प्यार में तो तरह-तरह के बहाने मिल ही जाते हैं । इसीलिए प्रेम संबंध में जाने से पहले इस लेख को पूरी तरह पढ़ लें ताकि आप प्यार का वास्तविक मतलब समझ पाएं ।

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