Qualities family head should have

परिवार के मुखिया मैं कौन-कौन से गुण होने चाहिए

Qualities family head should have

अगर एक संगठन के मुखिया में सामर्थ्य और योग्यता हो तो वह कमजोर से कमजोर संगठन को भी सफलता के शिष में ले जा सकता है । मनोविज्ञान के मुताबिक अगर नेतृत्व अच्छा हो तो एक संगठन श्रेष्ठ बन सकता है । परिवार दुनिया के सबसे छोटे संगठन का नाम है । इसमें कोई संदेह नहीं कि दुनिया के सभी परिवार सुखी और सफल होंगे तो समाज सुखी और सफल रहेगा । लेकिन ऐसा होना तभी संभव है जब परिवार का मुखिया सामर्थ्यबान, योग्य और नेतृत्व गुणों का धनी हो । चलिए देखते हैं एक सफल परिवार के लिए एक परिवार के मुखिया में कौन-कौन से नेतृत्व गुण होने चाहिए

परिवार का मुखिया एक अच्छा इंसान हो

Personality Counselling / परिवार के मुखिया में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

अच्छे नेतृत्व के लिए परिवार के मुखिया में जो सबसे पहला गुण होना चाहिए वह है –  वह खुद एक अच्छा इंसान हो ।

जी हां ।

परिवार से पहले आता है व्यक्ति । अगर एक परिवार का मुखिया खुद ही एक अच्छा इंसान नहीं है तो वह कभी भी अच्छा नेतृत्व नहीं कर पाएगा ।

देखिए परिवार में हर समय एक जैसा नहीं होगा । कई बार हालात बहुत ही विपरीत भी होंगे । हो सकता है परिवार के मुखिया को अपना बेहतर देने के बाद भी बदले में कुछ ना मिले । ऐसे स्थान में केवल एक अच्छा इंसान ही एक परिवार को अच्छे से नेतृत्व कर सकता है । उसमें इंसानियत, परोपकारिता, दया, सहनशीलता, निस्वार्थ भावना, कर्तव्यनिष्ठा, जिम्मेदारी लेना आदि अच्छे गुण होने चाहिए ।

याद रखें परिवार के बुरे वक्त में ही परिवार के मुखिया का चरित्र परीक्षा होता है । कठिन समय में ही पता चलता है कि वह कितना योग्य और चरित्रवान व्यक्ति है । कोई स्वार्थी और बुरा व्यक्ति कभी भी अच्छा नेतृत्व करने वाला नहीं बन सकता ।

हमारे देश में या तो सबसे बुजुर्ग या फिर पैसा कमाने वाले व्यक्ति को ही परिवार का मुखिया मान लिया जाता है । फिर चाहे वह योग्य हो या ना हो । इसी कारण हमारे देश में परिवारों का इतना बुरा हाल है । जबकि परिवार का मुखिया हमेशा एक अच्छा और योग्य सदस्य को ही बनाना चाहिए ताकि परिवार का नेतृत्व अच्छे से हो सके ।

विश्वास कर पाने का गुण

Personality Counselling / परिवार के मुखिया में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

विश्वास कर पाने का गुण । आज की परिस्थितियों में यह दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गुण है जो परिवार के मुखिया में होना चाहिए ।

आज समाज का सबसे बड़ा समस्या यही है । किसी को किसी पर विश्वास ही नहीं । यही हाल परिवारों का भी है । परिवार के सदस्यों को एक दूसरे पर विश्वास है ही नहीं । सदस्यों को तो छोड़िए परिवार के मुखिया को ही परिवार के सदस्यों पर विश्वास नहीं होता ।

घर के बाकी के सदस्य और खासकर बच्चे वही अनुसरण करते हैं जो परिवार का मुखिया करता है । अगर घर के मुखिया को ही बाकी सदस्यों पर या किसी एक सदस्य पर विश्वास ना हो तो उस परिवार के सदस्यों मे अविश्वास बढ़ने लगता है । फिर उस परिवार को बिखरते देर नहीं लगती । इसीलिए परिवार के मुखिया में बाकी सदस्यों में अच्छाई देखने का और विश्वास कर पाने का गुण होना चाहिए ।
एक मुखिया के तौर पर अगर आप परिवार के सभी सदस्यों पर विश्वास कर पाएंगे तो आप परिवार मैं सही निर्णय ले पाएंगे । सबको बराबरी दे पाएंगे और किसी के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा । इसीलिए परिवार के मुखिया में परिवार के सभी सदस्यों पर विश्वास कर पाने का गुण होना बहुत जरूरी है ।

यहां मैं एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहूंगा । मेरे 5 साल के काउंसलिंग कैरियर में जिस विषय पर सबसे ज्यादा प्रश्न मुझसे पूछे गए हैं वह इसी संबंध में थे । व्यक्तिगत रूप से मेरा यह मानना है कि अगर किसी व्यक्ति पर उसके परिवार के मुखिया को और बाकी सदस्यों को विश्वास नहीं तो उस व्यक्ति को उस परिवार से अलग अपना एक परिवार बनाना चाहिए । इसी में उसकी भलाई होती है । हालांकि यह मेरा व्यक्तिगत मत है, मैं किसी को ऐसा सलाह नहीं दे रहा । अगर आप ऐसे किसी स्थिति में हैं तो कोई कदम उठाने से पहले बेहतर होगा काउंसलिंग ले लें ।

पक्षपात ना करना

परिवार के मुखिया में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

पूरी दुनिया में परिवारों में असंतोष होने का यह सबसे प्रमुख कारण है । अयोग्य व्यक्ति जब परिवार का मुखिया बन जाता है तो वह पक्षपात करने लगता है और उसे अपनी गलती का एहसास भी नहीं होता ।

पक्षपात करने वाला व्यक्ति तो किसी भी रुप से परिवार का मुखिया बनने योग्य नहीं होता । हमारे देश में तो घर-घर में ऐसा पक्षपात होता पाया जाता है । कभी बेटा-बेटी में तो कभी बहू बेटी में । कभी पढ़ाई को लेकर तो कभी आर्थिक स्थिति को लेकर, कभी रूप रंग को लेकर तो कभी उपलब्धियों को लेकर ।

यह भी देखा गया है कि जो परिवार के मुखिया के बातों के हिसाब से चलें उन्हें ज्यादा महत्व दिया जाता है और जो उनके विरुद्ध चलें उन्हें कम महत्व या सम्मान दिया जाता है ।

जिस परिवार में ऐसा भेदभाव होता है और जिस परिवार का मुखिया ऐसा भेदभाव करता है उसका नेतृत्व क्षमता बहुत ही निम्न स्तर का होगा । ऐसे ही परिवारों में आत्महत्या और अपराध जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं ।

इसीलिए परिवार के मुखिया में पक्षपात ना करने का गुण होना चाहिए । उसमें सबको बराबर हक और सम्मान देने का गुण होना चाहिए ।

याद रखें अगर आप परिवार के मुखिया हैं और परिवार के किसी सदस्य की आप से नहीं बनती या सोच नहीं मिलती और आप उसके साथ किसी भी तरह का पक्षपात करते हैं तो आप उस परिवार का मुखिया बनने योग्य नहीं है ।

एक अच्छा, बुद्धिमान और न्यायप्रिय मुखिया विचारों के मतभेद या व्यक्तिगत नाराजगी के कारण किसी के साथ पक्षपात नहीं करता । ऐसा केवल एक स्वार्थी व्यक्ति ही कर सकता है । जबकि परिवार के मुखिया को निस्वार्थ भावना से सबको बराबरी ही देना चाहिए । वरना इसमें कोई संदेह नहीं कि उस परिवार का सुख शांति नष्ट हो जाएगा । बार-बार झगड़े होंगे और परिवार में नफरत का माहौल बनेगा ।

Personality Counselling / परिवार के मुखिया में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

सबको साथ लेकर चलने का गुण

ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है जो परिवार के मुखिया में होना ही चाहिए । परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ लेकर चलने का गुण । एकता(unity) बना के रखने का गुण ।

यह एक मुश्किल काम है । दो अलग-अलग व्यक्तियों का सोच, समझ और व्यक्तिगत चाहतें कभी एक जैसी नहीं हो सकतीं । कई बार तो वह एक दूसरे के विरुद्ध भी होंगी । ऐसे में परिवार के मुखिया को सब को एक साथ लेकर चलना मुश्किल होगा ।

अपनी समझ और बुद्धिमता से आप यह कर सकते हैं । याद रखिए हर चीज का एक समाधान तो होता ही है । मुखिया को हर सदस्य के व्यक्तिगत अधिकार और परिवार के प्रति जिम्मेदारी को अच्छे से समझना भी होगा और समझाना भी होगा । फिर उसी हिसाब से सबको नेतृत्व देना होगा । इस संबंध में अगर आपको कोई सहायता चाहिए तो आप हमें संपर्क कर सकते हैं ।

एक बड़े दुख की बात यह भी है कि कुछ परिवार के मुखिया उस परिवार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए परिवार के बाकी सदस्यों को आपस में लड़वातें हैं । निहायती स्वार्थी किशन के होते हैं यह लोग । ऐसे लोगों को परिवार का मुखिया बिल्कुल भी नहीं बनाना चाहिए ।
देखिए कई बार परिवार के सदस्यों में आपसी नाराजगी होती है । कई बार व्यक्तिगत लाभ या हानि को लेकर परिवार के सदस्यों में आपसी टकराव होता है । तो कई बार परिवार के किसी सदस्य का वर्चस्व परिवार के मुखिया से ज्यादा होने लगता है । या फिर परिवार के किसी सदस्य का परिवार के मुखिया से अच्छा नहीं बनता ।

ऐसी स्थिति में कुछ परिवार के मुखिया ऐसे होते हैं जो परिवार के सदस्यों को एक दूसरे के विरुद्ध कर देते हैं । Divide and rule policy । बड़े दुख और शर्म की बात है कि कुछ लोग निजी स्वार्थ पूरा करने के लिए अपने परिवार में ऐसा भी करते हैं । इसे उस परिवार और उसके सदस्यों का दुर्भाग्य ही कहिए ।

इसीलिए परिवार के मुखिया में सबको साथ लेकर चलने का गुण होना बहुत ही जरूरी है

बेहतरीन रूप से वार्तालाप (communication} कर पाने की कला

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वह जुबान ही है जिससे महाभारत भी हो सकता है और विश्व शांति भी ।

इसीलिए परिवार के मुखिया में वार्तालाप कर पाने की कला बेहतर होनी चाहिए । वे बाकी सब से खुलकर बात कर पाएं और बाकी सारे सदस्य भी खुलकर उनसे बात कर पाएं । एक अच्छी पारदर्शिता होनी चाहिए परिवार के मुखिया का बाकी सदस्यों के साथ । उन्हें बाकी सदस्यों को यह यकीन दिलाना चाहिए कि आप सब बेझिझक अपनी बात मुझे बता सकते हैं ।

परिवार के मुखिया को मधुर भाषी होना चाहिए । ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए जो किसी भी सदस्य के आत्मसम्मान या अहम को चोट पहुंचाए । परिवार में उठने वाले झगड़े और संघर्षों को बातचीत से सुलझा लेने की कला आनी चाहिए ।

बेहतरीन बातचीत की कला हो तो परिवार के मुखिया सभी सदस्यों के साथ बेहतरीन रिश्ते बना सकते हैं

अक्सर परिवार के सदस्यों में गलतफहमी पैदा होती रहती है । ऐसी स्थिति में अगर परिवार के मुखिया परिवार के सदस्यों के साथ खुलकर बातचीत कर पाते हैं तो वह ऐसी गलतफहमीयों को सरलता से दूर कर सकते हैं । विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बेहतरीन वार्तालाप शैली से परिवार को बिखरने से बचा सकते हैं ।

पर दुख की बात यह है कि हमारे देश में ज्यादातर परिवार के मुखिया ना तो वार्तालाप शैली से परिचित हैं और ना ही मधुर भाषी हैं । उल्टा वो कड़वी बातें बोलकर, असभ्य भाषा प्रयोग कर के परिवार के बाकी सदस्यों के आक्रोश का कारण बनते हैं ।

निसंदेह ऐसी स्थिति में उस परिवार के बाकी सदस्य उस मुखिया से प्यार तो नहीं करेंगे । ऐसे ही मुखिया को अक्सर परिवार के बाकी सदस्यों से दुख-दर्द मिलता है । फिर वह शिकायत करते हैं कि मैंने सबके लिए बहुत कुछ किया लेकिन बदले में किसी को मेरी परवाह नहीं, किसी को मुझसे प्यार नहीं ।

आप किसी की सेवा करते हुए अपना सारा जीवन भी गुजार दीजिए पर वह आपसे वैसा ही व्यवहार करेगा जैसा स्थान आपने अपने वार्तालाप और अपनी जुबान के इस्तेमाल से उसके मन में बना रखा है ।

इसीलिए बस परिवार के मुखिया को ही नहीं बल्कि परिवार के सभी सदस्यों को मधुर भाषी होना बहुत जरूरी है और परिवार के मुखिया को वार्तालाप की कला में निपुण होना बहुत जरूरी है ताकि वह परिवार को बेहतर तरीके से संभाल सके ।

परिवार का मुखिया न्याय प्रिय होना चाहिए

परिवार के मुखिया में कौन-कौन से गुण होने चाहिए

संगठन चाहे कोई भी हो उसका आधार होता है न्याय ।
अगर परिवार का मुखिया न्याय प्रिय नहीं है और परिवार के सदस्यों से न्याय नहीं करता, तो वह परिवार सिर्फ एक नाम का ही परिवार होगा । उसके सदस्य सिर्फ निजी स्वार्थ के लिए ही एक दूसरे से जुड़े रहेंगे ।

परिवार के मुखिया को व्यक्तिगत पसंद-नापसंद, मत-भेद को अलग रखकर हमेशा हर हाल में परिवार में न्याय को ही सर्वोपरि रखना चाहिए ।

देखिए कोई भी इतना मूर्ख नहीं होता कि वह अपने साथ होने वाला अन्याय ना समझ पाए । अगर परिवार का मुखिया किसी भी कारण से परिवार के किसी भी सदस्य के साथ किसी तरह का अन्याय करता है, तो वह वास्तव में नफरत का एक बीज बो रहा होता है । यह बीच उसी समय तो नहीं पर भविष्य में 10 – 20 साल बाद परिवार के उस मुखिया और बाकी सदस्यों के लिए दुखों का फल जरूर बन जाता है ।

इसीलिए अगर आप परिवार के मुखिया हैं तो ऐसी मूर्खता बिल्कुल ना करें । परिवार के किसी भी सदस्य के साथ अन्याय करके वास्तव में आप खुद के लिए ही कब्र खोद रहे होते हैं । जिसका ज्ञान जब तक आप को होगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी ।

इसीलिए परिवार के मुखिया को हमेशा परिवार में सबके साथ न्याय पूर्ण व्यवहार ही करना चाहिए

परिवार के सदस्यों का भविष्य निर्माण करवा पाने का गुण

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किसी का भविष्य निर्माण ना तो उसे किसी बेहतरीन विद्यालय में दाखिला दिला के किया जा सकता है और ना ही व्यापार के लिए खूब सारा धन देकर । किसी का भविष्य निर्माण तो उसे अच्छे संस्कार देकर किया जा सकता है । उसका चरित्र गठन करके किया जा सकता है । और ऐसा परिवार के मुखिया तभी कर सकते हैं जब उनमें इतनी समझ और बुद्धि हो । वरना हमारे देश में तो ज्यादातर लोग यह मानते हैं कि जिसके पास बड़ी डिग्री वह ज्यादा योग्य । वही ज्यादा सफलता हासिल कर पाएगा ।

पर क्या वास्तव में ऐसा है ?

अगर ऐसा होता तो फिर बड़े-बड़े डिग्रियों के साथ आजकल लोग बेरोजगार क्यों घूम रहे हैं ? क्यों इन्हें बड़ी डिग्रियां होने के बावजूद उनकी नौकरी करनी पड़ती है जो खुद कम पढ़े लिखे हैं ?

दूसरी तरफ दुनिया के बड़े बड़े बिजनेसमेन जिनके पास कोई बड़ी डिग्री नहीं, जो अमीर घराने से भी नहीं थे, वह आज दुनिया के सफलतम लोग हैं और ऐसे कई डिग्री वालों को नौकरी पे भी रखते हैं । जैसे कि स्टीव जॉब्स, संदीप महेश्वरी, बिल गेट्स, धीरूभाई अंबानी ।

इसका सीधा सा अर्थ यह है कि कागजी डिग्रियों का बुद्धिमानी और सफल होने से कोई लेना देना नहीं है ।

सफल होने के लिए तो निरंतर परिश्रम करने की क्षमता होनी चाहिए । विपरीत परिस्थितियों में भी हार ना मानने का गुण होना चाहिए । दृढ़ निश्चय, दृढ़ संकल्प होना चाहिए । सपने देखने की हिम्मत होनी चाहिए और सबसे बड़ी बात हमेशा कुछ ना कुछ सीखने की भूख होनी चाहिए ।

पर अफसोस बहुत ही कम परिवारों के मुखिया अपने परिवार के सदस्यों को यह सब बातें सिखाते हैं । वरना ज्यादातर तो यही कहते हैं कि आप पढ़ लिखकर अच्छी डिग्री हासिल कीजिए और कोई अच्छी नौकरी कीजिए ।

याद रखें परिवार के मुखिया को डिग्रियों का गुलाम नहीं होना चाहिए । उन्हें यह पता होना चाहिए कि वास्तव में जीवन में सफलता कैसे पाई जाती है । उनका दिमाग खुला होना चाहिए । परिवार के मुखिया को चाहिए कि वह बाकी सदस्यों के योग्यता को डिग्रियों से ना आंके बल्कि उनके अंदर छुपे प्रतिभाओं को पहचाने । उन्हें प्रोत्साहित करे ताकि वह अपने प्रतिभा को और निखार पाएं । उनके गुणवत्ता को बढ़ाने में पूरी पूरी सहायता करे और उनका बेहतरीन चरित्र गठन करे । याद रखें ईश्वर ने सबको अलग-अलग प्रतिभाएं दी हैं ।

नीचे कमेंट करके बताइए अगर आप किसी परिवार के मुखिया बने तो आप बाकी सदस्यों के प्रतिभा को कैसे पहचानेंगे ? कहीं आप भी तो उन्हें डिग्रियों से नहीं तोलेंगे ?”

 

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